जनगाथा
समकालीन लघुकथा के विचार एवं रचना-पक्ष की अव्यावसायिक ब्लॉग पत्रिका
Tuesday, 28 December 2010
‘मेरी श्रेष्ठ लघुकथाएँ’, अन्धा मोड़’ तथा ‘कबूतरों से भी खतरा है’
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--> कबूतरों से भी ख़तरा है एन॰ उन्नी हिन्दी लघुकथा के वरिष्ठ और सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनकी रचनाओं से पहला परिचय बलराम द्वार...
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Sunday, 28 November 2010
सुभाष नीरव की लघुकथाएँ
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--> सुभाष नीरव नौवें दशक के प्रतिभासंपन्न लघुकथाकार हैं। रूपसिंह चंदेल व हीरालाल नागर के साथ उनकी लघुकथाओं का एक...
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Tuesday, 26 October 2010
उन्नीसवाँ अन्तर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन, पंचकुला(हरियाणा)
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--> पंचकुला (हरियाणा) में दिनांक 23 अक्टूबर, 2010 को लघुकथा सम्मेलन संपन्न हुआ है। प्रेषित प्रपत्र के अनुसार — सम्मेलन के पहले सत्...
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उन्नीसवाँ अन्तर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन, पंचकुला(हरियाणा)/ शेष रचनाएँ
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॥4॥ क्या हम भी…/ सुशील ‘हसरत’ नरेलवी “ कितनी बार कहा है कि जब कमरे में नहीं बैठना हो तो कमरे से बाहर आते समय ‘लाईट’ व पंखे को बंद कर दि...
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