जनगाथा
समकालीन लघुकथा के विचार एवं रचना-पक्ष की अव्यावसायिक ब्लॉग पत्रिका
Saturday, 27 November 2021
लघुकथा जीवन की आलोचना है/डॉ. कमल किशोर गोयनका
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Tuesday, 5 October 2021
लघुकथा के पुरोधा : डॉ.सतीशराज पुष्करणा / रामेश्वर काम्बोज ´हिमांशु´
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(स्व.) डॉ. सतीशराज पुष्करणा जी के 75वें जन्मदिन पर विशेष आलेख : लघुकथा नगर, महेन्द्रू पटना-800006 : यह पता रहा एक लम्बे अर्से तक। कोई मक...
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लघुकथा की बहुकोणीय परख का प्रयास : उत्कण्ठा के चलते / सतीश राठी
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सतीश राठी लघुकथा की पड़ताल करने के उद्देश्य से लघुकथा की गुणवत्ता की समालोचना करने का बहुत सारा काम सारे देश में हुआ है, फिर भी लघुकथा की ...
Friday, 1 October 2021
अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम है लघुकथा : राम मूरत 'राही'
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बचपन में कहानी, उपन्यास पढ़ने का बहुत शौक था। तभी मेरे मन में कहानीकार बनने की इच्छा जाग्रत हुई थी। मैंने 1980 यानी उन्नीस वर्ष की उम्र में...
Wednesday, 14 July 2021
स्मृति : रवि प्रभाकर
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(रचनाशील व्यक्ति को उसकी रचनाशीलता के माध्यम से याद करने से बेहतर अन्य कोई माध्यम नहीं। प्रिय रवि प्रभाकर को (लेखक रूप में उनके जनक) योगराज ...
Monday, 12 July 2021
लघुकथा-टाइम्स/मई 2018/कांता रॉय (सं.)
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मासिक लघुकथा टाइम्स (भोपाल) मई –२०१८ (बारह पृष्ठ) लघुकथा शोध केंद्र भोपाल म.प्र. (वर्ष:१, अंक:१ ) समीक्षा मेरी कलम से --- मिन्नी मिश्रा सम्...
Monday, 5 July 2021
लघुकथा में समालोचना का भविष्य-2/ रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु'
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दिनांक 04-7-2021 के बाद दूसरी, समापन कड़ी अच्छा लेखन या संकलनों का प्रकाशन कौन महत्त्वपूर्ण है? रमेश बतरा का कोई लघुकथा-संग्रह नहीं छपा; लेक...
Sunday, 4 July 2021
लघुकथा में समालोचना का भविष्य-1/रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु'
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दो कड़ियों में समाप्य लेख की पहली कड़ी साहित्य की सारी विधाएँ, सभी साहित्यकार निष्पक्ष चिन्तन और तटस्थ मूल्यांकन से ही परखे जा सकते हैं । जि...
Thursday, 1 July 2021
शरद आलोक की लघुकथाएँ/बलराम अग्रवाल
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कबीर का दर्शन है कि मनुष्य का शरीर, 'पानी केरा बुदबुदा' यानी पानी के बुलबुले की तरह क्षणभंगुर है। लेकिन बुलबुले का स्वयं की उत्पत्त...
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