जनगाथा
समकालीन लघुकथा के विचार एवं रचना-पक्ष की अव्यावसायिक ब्लॉग पत्रिका
Monday, 28 February 2011
सुनील गज्जाणी की चार लघुकथाएँ
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--> ॥1॥ यथार्थ '' माँ! कितना अच्छा होता कि हम भी धनी होते। हमारे भी यूँ ही नौकर-चाकर होते। ऐशो-आराम होता। '' ...
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Friday, 28 January 2011
भारत व मॉरीशस का हिंदी लघुकथा संसार
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--> दोस्तो! गत दिनों तीन लघुकथा संग्रह —' घाव करे गम्भीर'(कथाकार : राज हीरामन), 'बूँद से समुद्र तक'(कथाकर : ...
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Tuesday, 28 December 2010
‘मेरी श्रेष्ठ लघुकथाएँ’, अन्धा मोड़’ तथा ‘कबूतरों से भी खतरा है’
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--> कबूतरों से भी ख़तरा है एन॰ उन्नी हिन्दी लघुकथा के वरिष्ठ और सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनकी रचनाओं से पहला परिचय बलराम द्वार...
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Sunday, 28 November 2010
सुभाष नीरव की लघुकथाएँ
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--> सुभाष नीरव नौवें दशक के प्रतिभासंपन्न लघुकथाकार हैं। रूपसिंह चंदेल व हीरालाल नागर के साथ उनकी लघुकथाओं का एक...
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