जनगाथा
समकालीन लघुकथा के विचार एवं रचना-पक्ष की अव्यावसायिक ब्लॉग पत्रिका
Wednesday, 8 October 2014
सुधा भार्गव की दो लघुकथाएँ
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माँ और माँ चित्र:बलराम अग्रवाल दिवाली के आठ दिन पहले ही त्योहारों का सिलसिला आरंभ हो गया है। आज अहोई अष्टमी है और घर-घर अहोई देवी क...
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Wednesday, 11 June 2014
व्यंजना के सफल प्रयोग / बलराम अग्रवाल
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सुभाष नीरव वि षय की एकता नता एवं प्रभावान्विति ( यू निटी आ फ इम्प्रेशन) समकालीन लघुकथा की ऐसी विशेषता है जिसे जाने-अनजाने अक्स...
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Monday, 26 May 2014
‘रोटी का टुकड़ा’ ले गए चोर / सुभाष नीरव
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भाई बलराम, कैप्शन जोड़ें फेसबुक पर किन्हीं संदीप तिवारी ' राज ' की लघुकथा ' प्रश्न ' पढ़कर मुझे एकाएक अपने द्व...
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