जनगाथा
समकालीन लघुकथा के विचार एवं रचना-पक्ष की अव्यावसायिक ब्लॉग पत्रिका
Monday, 26 May 2014
‘रोटी का टुकड़ा’ ले गए चोर / सुभाष नीरव
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भाई बलराम, कैप्शन जोड़ें फेसबुक पर किन्हीं संदीप तिवारी ' राज ' की लघुकथा ' प्रश्न ' पढ़कर मुझे एकाएक अपने द्व...
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Sunday, 13 April 2014
सभी सुलभ शब्द अपनाने योग्य नहीं होते / बलराम अग्रवाल
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[डॉ॰ रामकुमार घोटड़ द्वारा संपादित पुस्तक 'गुलाम भारत की लघुकथाएँ' की समीक्षा] ...
Monday, 3 February 2014
प्रो॰ रूप देवगुण के सवाल
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हिन्दी लघुकथा के वरिष्ठ हस्ताक्षर प्रो॰ रूप देवगुण का एक प्रश्न-पत्रक कल प्राप्त हुआ है , साथ ही व्यक्तिगत अनुरोध भी कि उन्हें सहयोग अ...
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